समाज के निर्माण में नारी का बहुत बड़ा एवं उच्चकोटी का योगदान है अत: उसका समाज में अत्याधिक महत्व हो जाता है । नारी समाज की जननी, चरित्रवान एवं गौरवमयी है । बच्चों में सु-संस्कारों की जन्मदात्री, लालन-पालन, चरित्र निर्माण और शिक्षा में पूर्ण सहयोगी तथा ममतामयी है । परिवार को सुचारू रूप से चलाने वाली कुशल गृहिणी, गृह लक्ष्मी एवं अन्नपूर्णा है । पति की छाया (जीवन संगिनी) बनकर निरंतर साथ निभाने वाली पवित्र गंगा की धारा और आर्थिक विकास में वह सह-भागिनी है ।संकट की घड़ियों में वह धैर्यवान, शौर्यवान और शक्ति स्वरूपा है । सामाजिक रीतियों-नीतियों का कुशलता पूर्वक निर्वाह करने वाली सुलक्षणा है ।